नई दिल्ली: वोटर लिस्ट अपडेट करने और चुनावी प्रक्रिया को और अधिक सटीकता लाने एवं सुविधाजनक बनाने के लिए चुनाव आयोग तीन नई पहल शुरू कर रहा है। इसमें चुनाव आयोग वोटर लिस्ट से ऐसे वोटरों के नाम काटने के लिए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से इलेक्ट्रॉनिक रूप से डेटा लेगा। जिन वोटरों की किसी ना किसी कारण से डेथ हो गई। ऐसे कई वोटरों के नाम उनकी मृत्यु के बाद भी कई बार वोटर लिस्ट से नहीं कटते हैं। कई बार परिवार भी संबंधित अधिकारियों को इस बारे में जानकारी नहीं देता है। लेकिन अब भविष्य में वोटर लिस्ट अपडेट करते वक्त इस तरह के वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जाएंगे, जिनकी डेथ हो गई होगी।
चुनाव आयोग ने यह जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि, ऐसा करने के दौरान संबंधित वोटर के इलाके के बीएलओ उनके घर जाकर इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि असल में जिस वोटर का नाम वह वोटर लिस्ट से डिलीट कर रहे हैं उसकी डेथ हो चुकी है। इसके लिए परिवार के वोटर के डेथ होने के बाद वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए जो फार्म नंबर-7 भरना होता था। उसका इंतजार किए बिना बीएलओ वोटर लिस्ट से उसका नाम काटकर वोटर लिस्ट को अपडेट कर सकेंगे।
चुनाव आयोग का यह कदम इस साल मार्च में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा पैन इंडिया सीईओ कॉन्फ्रेंस उठाए गए कदमों के अनुरूप है। इसके अलावा चुनाव के दौरान वोटरों को मिलने वाली वोटर इनफार्मेशन स्लिप को भी और अधिक वोटर फ्रेंडली बनाया जा रहा है। इसके डिजाइन में बदलाव करते हुए पर्ची के टॉप में ही पार्ट नंबर और सीरियल नंबर को बोल्ड अक्षरों में लिखा जाएगा। इसके अलावा वोटरों के घरों में जाने वाले बीएलओ के लिए आयोग की तरफ से वोटरों और उनके परिवार की सुरक्षा की दृष्टि से विशेष आईडी कार्ड जारी किए जा रहे हैं। ताकि वोटरों को यह सुनिश्चित हो सके कि बीएलओ असली सरकारी कर्मचारी है।