देहरादूनः उत्तराखंड सरकार में उप निदेशक सुजाता चार सालों से प्रमोशन का इंतजार कर रही थीं। हाई कोर्ट से अवमानना नोटिस मिलने के बाद सरकार ने सुजाता के रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले उनको संयुक्त निदेशक के पद पर पदोन्नत करने का आदेश जारी किया है। हाई कोर्ट ने 5 सितंबर, 2024 को उत्तराखंड के महिला कल्याण और बाल विकास विभाग को पदोन्नति संबंधी आदेश दिया था।
अदालत ने विभागीय सचिव से उसके निर्देश की अवहेलना करने के लिए सवाल किया और पूछा कि अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। सुजाता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर उनकी पदोन्नति में देरी कर रही है। सुजाता के रिटायरमेंट को देखते हुए, उनके वकील ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इससे पहले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, लगभग छह महीने हो गए हैं। प्रथम दृष्टया अवज्ञा इस अदालत द्वारा जारी निर्देश की अवमानना प्रतीत होती है। इसलिए, प्रतिवादी को कारण दिखाना चाहिए कि अवज्ञा को अवमानना कार्यवाही का विषय क्यों नहीं बनाया जाना चाहिए।विभागीय सचिव का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने अदालत को सूचित किया कि उसके आदेश के अनुपालन में, विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने 16 अक्टूबर, 2024 को बैठक की और याचिकाकर्ता की उप निदेशक से संयुक्त निदेशक के रूप में पदोन्नति को मंजूरी दी।
24 अप्रैल को अदालत ने आदेश दिया, मामले को देखते हुए, डीपीसी की सिफारिश को जल्द से जल्द लागू करने के लिए राज्य को निर्देश देने के साथ रिट याचिका का निपटारा किया जाता है, लेकिन 28 अप्रैल के बाद नहीं। निर्देश के बाद अतिरिक्त सचिव प्रशांत आर्य ने पदोन्नति आदेश जारी किया। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने बाद में विभाग के अनुपालन के बाद याचिका का निपटारा कर दिया।