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अगर सहमति से संबंध बिगड़ते हैं या दूरी बढ़ती है तो यह बलात्कार का आधार नहीं हो सकता... सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी.

 
  • Kunal Kataria
  • 27 May 2025
  • 882
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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यदि कोई सहमति से बना संबंध बिगड़ जाए या साथी एक-दूसरे से दूर हो जाएं, तो यह आपराधिक कार्रवाई की मांग का आधार नहीं बन सकता। ऐसा करना न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालता है, बल्कि आरोपी की पहचान पर भी धब्बा लगाता है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ दर्ज रेप के केस को रद्द करते हुए उक्त टिप्पणी की है।
 

क्या है मामला?
शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के सातारा में जुलाई 2023 में एक महिला द्वारा विवाह का झूठा आश्वासन देकर बलात्कार का आरोप लगाने के मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि अगर एफआईआर में दर्ज आरोपों को भी सही मान लिया जाए, तब भी ऐसा प्रतीत नहीं होता कि शिकायतकर्ता की सहमति उसकी इच्छा के खिलाफ केवल विवाह के आश्वासन पर ली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार में यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें शुरुआत से ही झूठा विवाह का वादा किया गया हो। सहमति से बना संबंध बिगड़ जाना या दूरी बढ़ जाना, आपराधिक केस का आधार नहीं हो सकता। बेंच ने कहा कि ऐसा आचरण अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालता है और आरोपी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को गहरा आघात पहुंचाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उस अपील पर सुनाया जो आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जून 2024 के आदेश के खिलाफ दाखिल की थी। हाई कोर्ट ने सातारा में दर्ज मामले को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी थी। एफआईआर में महिला ने आरोप लगाया था कि जून 2022 से जुलाई 2023 तक आरोपी ने विवाह का झूठा आश्वासन देकर उसके साथ बलात्कार किया। आरोपी ने इन आरोपों से इनकार किया था। बेंच ने कहा कि केस दर्ज होने के बाद आरोपी ने सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी थी, जो अगस्त 2023 में उसे मिल गई थी। जांच से यह भी पता चला कि महिला और आरोपी की जान-पहचान जून 2022 से थी और महिला ने खुद स्वीकार किया था कि वे एक-दूसरे से बार-बार मिलते थे और प्रेम में पड़ गए थे। साथ ही, 29 दिसंबर 2022 को महिला ने अपने पूर्व पति से ‘खुल्लानामा’ लिया था जो मुस्लिम महिलाओं को एकतरफा तलाक का अधिकार देता है।

बेंच ने कहा कि यह कल्पना करना कठिन है कि शिकायतकर्ता ने विवाह के आश्वासन पर आरोपी से शारीरिक संबंध बनाए, जबकि वह पहले से ही विवाहित थी। बेंच ने कहा कि महिला का आरोपी के गांव बिना सूचना दिए जाना उसकी व्यथित और अशांत मानसिक स्थिति को दर्शाता है। यह संकेत करता है कि शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज मामला संभवत व्यक्तिगत असंतोष और उद्देश्यपूर्ण दुर्भावना पर आधारित हो सकता है। बेंच ने कहा कि एक विवाहित महिला, जिसकी चार वर्ष की संतान है, यह विश्वास करना कठिन है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति के साथ लंबे समय तक संबंध में रही होगी जिसने उसका यौन शोषण किया हो। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।बेंच ने कहा कि आरोपी केवल 25 वर्ष का है न्याय के हित में यही उचित होगा कि वह किसी लंबी मुकदमेबाज़ी में न फंसे। इस स्टेज पर ही उसके खिलाफ की गई कार्यवाही रद्द की जाती है।

 

 
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