देहरादून: उत्तराखंड पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन प्रहार' है। पुलिस की 23 विशेष टीमों ने 17 राज्यों में छापेमारी की। उन्होंने 50 से ज्यादा साइबर अपराधियों पर कार्रवाई की है। पुलिस ने 30 से ज्यादा भगोड़े साइबर अपराधियों के घरों पर नोटिस भी चिपकाए हैं। उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध के चलते यह कार्रवाई की गई। 2023 में लोगों को 69 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। 2024 में यह नुकसान बढ़कर 170 करोड़ रुपये हो गया। पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने और साइबर अपराध को रोकने के लिए यह अभियान चलाया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस देश की पहली पुलिस है, जिसने साइबर अपराधियों के खिलाफ इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। इससे साइबर अपराधियों को यह संदेश गया है कि वे कानून से बच नहीं सकते हैं। राज्य पुलिस का यह अभियान साइबर अपराध के खिलाफ एक निर्णायक कदम है। इस पहल से न केवल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित हो रही है, बल्कि अन्य राज्यों की पुलिस एजेंसियों के साथ समन्वय भी मजबूत हो रहा है।
पुलिस के अनुसार, देहरादून और रुद्रपुर के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की टीमों ने मिलकर काम किया। उन्होंने स्थानीय पुलिस, अन्य साइबर क्राइम यूनिट और तकनीकी एजेंसियों से जानकारी जुटाई। उन्होंने अपराधियों के पते, मोबाइल नंबर, बैंक खाते, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य डिजिटल सबूतों की जानकारी निकाली। टीमों ने 52 ऐसे लोगों की पहचान की, जो लंबे समय से फरार थे और साइबर अपराध में शामिल थे। इन सभी को कानूनी नोटिस भेजे जा चुके हैं।
पुलिस ने बताया कि 7 साइबर अपराधी पहले ही दूसरे राज्यों की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं और वे जेल में बंद हैं। इनके लिए B-वारंट प्राप्त किए गए हैं। अब इनसे पूछताछ की जाएगी। अदालत द्वारा जारी किए गए 6 जमानती वारंट भी तामील किए गए। पुलिस को पता चला कि 225 अपराधियों ने फर्जी नाम, पते और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बैंक खाते खोले और मोबाइल नंबर लिए थे। यह जानकारी अन्य राज्यों की पुलिस के साथ साझा की गई है, ताकि वे भी कार्रवाई कर सकें।
अप्रैल में STF (स्पेशल टास्क फोर्स) ने 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टीमें भेजी थीं। इन टीमों को 200 से ज्यादा मामलों में शामिल 337 साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया था। 'ऑपरेशन प्रहार' के पहले चरण में 272 साइबर अपराधियों को निशाना बनाया जाएगा। दूसरे चरण में 65 साइबर अपराधियों पर कार्रवाई होगी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में 40, महाराष्ट्र में 38, उत्तर प्रदेश में 28, राजस्थान में 28, तमिलनाडु में 25, पश्चिम बंगाल में 18, कर्नाटक में 17, गुजरात में 16, नागालैंड में 15, मध्य प्रदेश में 14, तेलंगाना में 11, केरल में 10, आंध्र प्रदेश में 10, बिहार में 9, हरियाणा में 8, पंजाब में 7, असम में 6, मणिपुर में 6, मिजोरम में 5, झारखंड में 5, गोवा में 5, ओडिशा में 4, छत्तीसगढ़ में 3, दिल्ली-एनसीआर में 3, त्रिपुरा में 2, दादरा नगर हवेली में 1, मेघालय में 1, हिमाचल प्रदेश में 1 और उत्तराखंड में 1 साइबर अपराधी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उत्तराखंड के लोगों को साइबर अपराध में बहुत नुकसान हुआ है। यह नुकसान 2023 में 69 करोड़ रुपये था, जो 2024 में बढ़कर 170 करोड़ रुपये हो गया। इसका मतलब है कि नुकसान में 146% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि डिजिटल गिरफ्तारी और निवेश धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से हुई है। उत्तराखंड पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराधियों ने हर दिन 46.57 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी की। पुलिस का कहना है कि वे साइबर अपराध को रोकने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। वे लोगों को जागरूक करने के लिए भी अभियान चला रहे हैं, ताकि लोग साइबर अपराध का शिकार न हों।