रुड़की: देश के बेहतरीन इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक आईआईटी-रुड़की भी उन संस्थानों में शामिल हो गया है, जिन्होंने तुर्किए से अपने संबंध खत्म कर लिए हैं। आईआईटी-रुड़की ने तुर्किए के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ अपने समझौता ज्ञापन (एमओयू) को रद्द कर दिया है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और जामिया मिलिया इस्लामिया के बाद यह तीसरा केंद्रीय विश्वविद्यालय बन गया है, जिसने तुर्किए विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक संबंध खत्म किए हैं। निजी विश्वविद्यालय लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने तुर्किए और अजरबैजान के विश्वविद्यालयों के साथ छह समझौता ज्ञापनों को खत्म कर दिया है।
आईआईटी-रुड़की और इनोनू विश्वविद्यालय के बीच जनवरी 2025 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया था। इस एमओयू के तहत दोनों संस्थानों के बीच रिसर्च में सहयोग और छात्र एवं संकायों आदान-प्रदान की व्यवस्था की गई थी। आईआईटी-रुड़की ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय हित के अनुरूप है। दरअसल, पाकिस्तान के साथ पिछले दिनों हुए युद्ध के दौरान तुर्किए ने खुलकर दुश्मन देश का साथ दिया। भारत ने इसे पाकिस्तान में पल रहे आतंकवाद का समर्थन माना। इसके बाद से देश में बायकॉट तुर्किए मुहिम ने जोर पकड़ा है।
आईआईटी-रुड़की के निदेशक कमल किशोर पंत ने कहा कि हमारी वैश्विक साझेदारी में हमारे देश के मूल्यों, प्राथमिकताओं और सुरक्षा संबंधी विचारों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। तमाम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संस्थान की ओर से एमओयू को खत्म करने का निर्णय लिया गया है। राज्य सरकार की ओर से संचालित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर ने भी इसी तरह के समझौता ज्ञापनों को खत्म कर दिया है। वहीं कई अन्य विश्वविद्यालय तुर्किए के उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ अपने अंतरराष्ट्रीय समझौतों की समीक्षा कर रहे हैं।
एलपीयू ने हाल ही में भारत-पाक तनाव के दौरान दोनों देशों के पाकिस्तान समर्थक रुख को सहयोग समाप्त करने का कारण बताया। इसमें छात्र और संकाय आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और दोहरी डिग्री कार्यक्रम शामिल थे। एलपीयू के चांसलर और राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं पर सुरक्षित नहीं है। इसे हर कक्षा, बोर्डरूम और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में संरक्षित किया जाना चाहिए।
भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ (AIU) ने गुरुवार को 1100 से अधिक विश्वविद्यालयों से पाकिस्तान, तुर्किए और बांग्लादेश के संस्थानों के साथ साझेदारी की समीक्षा करने और यदि आवश्यक हो तो निलंबित या समाप्त करने का आग्रह किया। यह अपील पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद की गई है, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई।
एआईयू के अध्यक्ष विनय कुमार पाठक ने इन देशों पर भारत विरोधी बयानों का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से अपने अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव में राष्ट्रीय एकजुटता दिखाने का आह्वान किया।