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  • दलाई लामा पर चीन का प्लान फेल तो लगी मिर्ची, क्या अब ड्रैगन को चिढ़ाएगा भारत, जानें हर डिटेल

दलाई लामा पर चीन का प्लान फेल तो लगी मिर्ची, क्या अब ड्रैगन को चिढ़ाएगा भारत, जानें हर डिटेल.

 
  • Kunal Kataria
  • 04 Jul 2025
  • 863
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नई दिल्ली: अभी तक दलाई लामा के पुनर्जन्म को लेकर कई तरह की बातें चल रही थीं। हालांकि, अब इन बातों पर विराम लग गया है। 14वें दलाई लामा , तेनजिन ग्यात्सो ने साफ कर दिया है कि 600 साल पुरानी यह परंपरा उनके बाद भी जारी रहेगी। इससे तिब्बती समुदाय के अलग-अलग गुट एक साथ आएंगे। चीन की तरफ से लगातार 'अपने खुद के दलाई लामा' बनाने की कोशिशें हो रहीं। हालांकि, इस ऐलान के बाद के ड्रैगन की कोशिशों को झटका लगेगा। दलाई लामा का यह फैसला उनके 90वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले आया है। उनका जन्मदिन 6 जुलाई को है।
 

दलाई लामा के ऐलान से चीन को झटका

दलाई लामा ने पहले ही कह दिया था कि इस बारे में फैसला तिब्बती लोग ही करेंगे कि दलाई लामा की परंपरा जारी रहनी चाहिए या नहीं। उन्होंने यह भी कहा था कि जब वह 90 साल के हो जाएंगे, तो वह तिब्बती बौद्ध धर्म के उच्च लामाओं, तिब्बती जनता और अन्य लोगों से सलाह लेंगे। इसके बाद ही वह तय करेंगे कि दलाई लामा की संस्था को जारी रखना चाहिए या नहीं। अब उन्होंने साफ कर दिया है कि यह संस्था जारी रहेगी। इससे उन अटकलों पर विराम लग गया है कि शायद दलाई लामा के बाद यह परंपरा खत्म हो जाएगी। पहले यह भी कहा जा रहा था कि नए दलाई लामा को लोकतांत्रिक तरीके से चुना जा सकता है।

दलाई लामा ने यह भी कहा कि उनका उत्तराधिकारी चीन के बाहर पैदा होगा। 1999 में, 14वें दलाई लामा ने चीन के दखल को भांपते हुए कहा था कि अगर मेरे पुनर्जन्म का चुनाव पारंपरिक तरीकों से होता है, तो मेरा कोई भी पुनर्जन्म तिब्बत या चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नहीं होगा। इससे उन्होंने चीन पर लगाम लगाने की कोशिश की। परंपरा के अनुसार, दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में माने जाने वाले बच्चे को पहचाना जाता है और उसे इस भूमिका के लिए तैयार किया जाता है।
 

चीन की प्लान कैसे हुआ फेल

चीन हमेशा से दलाई लामा को एक अलगाववादी मानता है। उसने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म को खोजने का अधिकार केवल उसी के पास है। हालांकि, इस ऐलान से चीन को दलाई लामा के बाद तिब्बत के विभिन्न संप्रदायों के बीच मतभेद पैदा करने के अवसर कम मिलेंगे। तिब्बती मामलों के जानकारों का मानना है कि अगर पुरानी परंपरा जारी नहीं रहती, तो इससे तिब्बती बौद्ध समुदाय में विभाजन हो सकता था। इससे पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक स्थिति और भी जटिल हो जाती।

दलाई लामा के दांव तिब्बत में खुशी की लहर

दलाई लामा ने 1969 में ही कह दिया था कि नए दलाई लामा पर फैसला तिब्बती लोग ही करेंगे। तिब्बती आध्यात्मिक नेता ने कहा था कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और केवल गादेन फोडरंग ट्रस्ट के पास उनके उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार होगा। गादेन फोडरंग ट्रस्ट की स्थापना दलाई लामा ने 2015 में की थी। दलाई लामा के इस फैसले से तिब्बती समुदाय में खुशी की लहर है। लोगों को उम्मीद है कि इससे तिब्बती संस्कृति और परंपराओं को बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, चीन की तरफ से आने वाली चुनौतियों का भी सामना किया जा सकेगा। यह फैसला तिब्बत के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
 

दलाई लामा पर क्यों है दुनिया की निगाहें

दलाई लामा बहुत ही सम्मानित व्यक्ति हैं। पूरी दुनिया में उनके अनुयायी हैं। उनका यह फैसला तिब्बती समुदाय के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। यह फैसला दिखाता है कि दलाई लामा अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाने के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं। उधर, चीन ने दलाई लामा की उत्तराधिकार योजना को खारिज करते हुए इस पर जोर दिया कि किसी भी भावी उत्तराधिकारी को उसकी मंजूरी लेनी होगी। इस तरह चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के साथ तिब्बती बौद्ध के दशकों पुराने संघर्ष में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
 

भारत में शरण... दलाई लामा से जुड़ी हर बात जानिए

दलाई लामा की तरफ दुनिया का ध्यान 1959 में उस समय गया जब वह कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के नेतृत्व में चीनी सेना की ओर से तिब्बत पर कब्जा किया गया। इसके बाद दलाई लामा तिब्बतियों के एक बड़े समूह के साथ भारत में शरण लेने के लिए आए थे। तब से वह धर्मशाला में रह रहे हैं। उनकी उपस्थिति चीन और भारत के बीच विवाद का विषय बनी रही। दलाई लामा के उत्तराधिकारी को भी तिब्बती स्वायत्तता के लिए संघर्ष को जारी रखना पड़ सकता है।
 

चीन और अमेरिका में भी बढ़ सकता है तनाव

दलाई लामा के उत्तराधिकारी के मुद्दे से चीन और अमेरिका के बीच भी नए तनाव की आशंका है क्योंकि अमेरिका का तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम 2020, चीन की नीति के उलट है। अमेरिकी अधिनियम में दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध धर्म के लिए अमेरिका के दृढ़ समर्थन की पुष्टि की गई है। उधर भारत ने दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर फैसले पर नजर बनाई हुई है। फैसले का स्वागत किया गया है।
 

भारत की नजर दलाई लामा के अगले दांव पर

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने 14वें दलाई लामा की ओर से दलाई लामा संस्था की निरंतरता के फिर से पुष्टि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय हिमालयी क्षेत्र और विश्व भर में लाखों लोगों के लिए अपार खुशी एवं आध्यात्मिक आश्वासन लेकर आया है। खांडू ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र के लोगों में दलाई लामा संस्था के प्रति गहरी आस्था और अटूट श्रद्धा है और यह पुष्टि करुणा, ज्ञान और शांति के मूल्यों के प्रति लोगों की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

 

 
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