देहरादून/रुड़की: उत्तराखंड में 20 साल से लापता एक व्यक्ति का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ये व्यक्ति उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का रहने वाला था और 20 साल पहले किसी को बिना बताए गायब हो गया। रुड़की पुलिस को एक दरगाह में साधु के वेश में रहते हुए पाया गया। पुलिस ने बताया कि 35 वर्षीय जितेंद्र कश्यप 2005 में 15 साल की उम्र में मुरादाबाद के दलपतपुर गांव स्थित अपने घर से इसलिए निकल गया था, क्योंकि उसकी विधवा मां ने नाश्ता खरीदने के लिए पैसे देने से मना कर दिया था।
परिवार की तमाम कोशिशों के बावजूद उसका कोई पता नहीं चला और मां को गहरा भावनात्मक आघात झेलना पड़ा था। लगभग आठ साल पहले उनका निधन हो गया और वो बेटे को ढूंढ भी नहीं पाईं। जितेंद्र कश्यप की असली पहचान सोमवार को 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत पुलिस सत्यापन अभियान के दौरान ही हुई। यह अभियान उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान उन लोगों के खिलाफ चलाया गया था जो कथित तौर पर साधु बनकर लोगों, खासकर महिलाओं और युवाओं को ठग रहे थे। इतने सालों तक जितेंद्र कश्यप ने मंदिर परिसर में भीख मांगकर गुजारा किया। रुड़की पुलिस ने मंगलवार को उसे उसके जीवित रिश्तेदारों को सौंप दिया, जो उससे मिलकर फूट-फूट कर रो पड़े।
जितेंद्र कश्यप के मामा चरण सिंह ने बताया कि वह पैदल ही निकला और धीरे-धीरे शायद बस या लिफ्ट लेकर कई महीनों बाद कलियार पहुंचा। वहां उसने भीख मांगना शुरू किया और कुछ साधुओं के साथ रहने लगा। हमने उस समय उसकी बहुत तलाश की थी।
पिरान कलियर थाने के प्रभारी रवींद्र कुमार ने कहा, जितेंद्र से उसके परिवार के बारे में कोई भी जानकारी प्राप्त करना बेहद मुश्किल था। चूंकि उसे सीखने में दिक्कत होती है, इसलिए हमें उसके रिश्तेदारों की पहचान करने से पहले धैर्यपूर्वक जांच करनी पड़ी और जानकारी के टुकड़ों को जोड़ना पड़ा।
उन्होंने आगे बताया कि ऑपरेशन कालनेमि के तहत राज्य में यह पहला ऐसा मामला है, जहां किसी लापता व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाया गया। पिरान कलियर पुलिस ने अब तक इस अभियान के तहत साधुओं का भेष धारण करने वाले 12 लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया है।