नई दिल्ली : संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को वंदे मातरम के 150 साल पूरा होने पर चर्चा हुई। चर्चा की शुरुआत पीएम मोदी ने की। चर्चा में कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हिस्सा लिया। प्रियंका गांधी ने इस दौरान वंदे मातरम पर हो रही चर्चा को लेकर ही सवाल उठाया। अपने भाषण के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह भाषण अच्छा देते हैं, लेकिन तथ्यों में कमजोर हैं। प्रियंका ने पीएम मोदी पीएम मोदी के 12 साल की तुलना अपने 12 महीने के संसद सदस्य के अनुभव से की।
प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में पंडित नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि वह देश के लिए जिए और देश की सेवा करते-करते दम तोड़ा। प्रियंका गांधी कहा कि अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से इन्हें (सत्ता पक्ष के सदस्यों को) एक सलाह देना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि कहा कि हमारे प्रधानमंत्री महोदय 12 साल से सदन में हैं, मैं मात्र 12 महीनों से हूं, फिर भी छोटी सी सलाह है। प्रियंका गांधी ने हाल ही में चुनाव के दौरान पीएम की तरफ से 99 बार अपमान की सूची का जिक्र किया।
#WATCH | During debate in Lok Sabha on 150 years of 'Vande Mataram, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, "Our colleagues in the ruling party have become so arrogant that they have started considering themselves superior to Mahatma Gandhi, Rabindranath Tagore, Rajendra Prasad,… pic.twitter.com/m9cghd4pIP
— ANI (@ANI) December 8, 2025
प्रियंका ने कहा कि आप नेहरू जी से जितनी शिकायते हैं, जितनी भी गलतियां उन्होंने की, जितनी भी गालियां देनी हैं, जितना भी अपमान करना है, उसकी भी एक सूची बना लीजिए। हम लोग इस पर चर्चा कर लेंगे। इसके लिए आप जितने घंटे भी कहें उतनी चर्चा कर लेंगे लेकिन सदन का कीमती समय बर्बाद मत कीजिए। सदन को जनता की समस्याओं की चर्चा करनी चाहिए। प्रियंका की इस बात पर सत्ता पक्ष के सदस्यों की तरफ से विरोध व्यक्त किया गया। इसके बाद सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
प्रियंका गांधी ने सदन में वंदे मातरम् पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि राष्ट्रीय गीत पर चर्चा की जरूरत नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह देश के कण-कण में बसा है और देश की भावना से जुड़ा है। प्रियंका गांधी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी भाषण अच्छा देते हैं, लेकिन तथ्यों के मामले में कमजोर पड़ जाते हैं। इसमें कला होती है कि कैसे जनता के सामने इसे रखा जाए। मैं नई हूं, जनता की प्रतिनिधि हूं, कलाकार नहीं हूं। इसलिए कुछ तथ्य रखना चाहती हूं।