मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वभर में पहचानी जाने वाली मसूरी अब तेजी से कंक्रीट के जंगल में तब्दील होती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है—प्लिंथ सर्टिफिकेट के नाम पर खेला जा रहा बड़ा खेल, जिसने पूरे निर्माण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मसूरी में इन दिनों निर्माण की नींव जमीन पर नहीं, बल्कि कागजों पर रखी जा रही है। नगर पालिका परिषद द्वारा धड़ल्ले से प्लिंथ सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं और इन्हीं सर्टिफिकेट के सहारे पहाड़ों को काटकर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। आरोप है कि पूर्व नगर पालिका बोर्ड के कार्यकाल में प्लिंथ सर्टिफिकेट देने के नाम पर नियमों को ताक पर रख दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिसूचित और संवेदनशील क्षेत्रों में यहां तक कि खड़े ढलानों और पहाड़ियों पर भी प्लिंथ सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग द्वारा बिना मौके का निरीक्षण किए ही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी कर दी गई। इसी एनओसी के आधार पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने नक्शों को मंजूरी दे दी।
सूत्रों के मुताबिक, मसूरी में ज्यादातर नक्शे डोमेस्टिक श्रेणी में पास किए गए हैं, लेकिन वास्तविकता में वहां होटल, होमस्टे, कैफे और अन्य कमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। यह न केवल भवन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मसूरी की कैरींग कैपेसिटी के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहले ही मसूरी की बढ़ती कैरींग कैपेसिटी को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। न तो जिला प्रशासन सक्रिय है और न ही पर्यावरण से जुड़े विभाग। नतीजा यह है कि दिन-रात जेसीबी मशीनें चल रही हैं और पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार, मसूरी में 11 मीटर से अधिक ऊंचाई का निर्माण स्वीकृत नहीं है, लेकिन हकीकत में इससे कहीं ऊंची इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर ये निर्माण कैसे और किसकी शह पर हो रहे हैं?
स्थानीय निवासियों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि खनन विभाग पूरी तरह मौन है और स्थानीय प्रशासन ने आंखें बंद कर रखी हैं। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं कि वे भ्रष्टाचार में लिप्त होकर इस पूरे खेल को अनदेखा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से मसूरी को बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्लिंथ सर्टिफिकेट, एनओसी और नक्शा पास करने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो मसूरी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।