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  • UGC Rules 2012: सुप्रीम कोर्ट ने फिर से लागू किया यूजीसी का पुराना 2012 का नियम, जानिए उसमें क्या है?

UGC Rules 2012: सुप्रीम कोर्ट ने फिर से लागू किया यूजीसी का पुराना 2012 का नियम, जानिए उसमें क्या है?.

 
  • Priyanka Thapa
  • 29 Jan 2026
  • 1124
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what is UGC 2012 old rules : सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए इक्विटी एक्ट 2026 पर रोक लगाते हुए पुराना 2012 का नियम लागू कर दिया है। अगले आदेश तक यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में यूजीसी का 2012 से चला आ रहा नियम 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, रेगुलेशंस 2012' ही लागू रहेगा। 2012 की गाइडलाइंस में कई प्रावधान थे, लेकिन उनमें OBC को शामिल नहीं किया गया था। इस बार, OBC को शामिल किया गया है, जिससे ये नियम और भी ज्यादा विवादित हो गए हैं। शिक्षा मंत्रालय के डेटा के अनुसार, OBC, SC और ST छात्र मिलकर अब कुल एनरोलमेंट का 61% हैं। आइए जानते हैं यूजीसी के 2012 के नियम में क्या-क्या है?
 

यूजीसी के 2012 के पुराने नियम में क्या है, जिसे कोर्ट ने फिर से लागू किया

दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने 17 सितंबर 2012 को भारत के सभी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में समानता को बढ़ावा देने और भेदभाव को रोकने के लिए नियम बनाए थे। तब यूजीसी ने कहा था कि हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज अपने कैंपस में इक्विल अपॉर्च्यूनिटी सेल (EOC) बनाए, जिसका काम एससी और एसटी स्टूडेंट्स की शिकायतें सुनना और कैंपस में समानता का मौहाल बनाना होगा। हालांकि यह सिर्फ एक एडवाइडरी थी, इसे अनिवार्य नहीं किया गया था।

सिर्फ SC-ST तक सिमित थे नियम

2012 के नियम खासतौर पर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) स्टूडेंट्स के लिए बनाए गए थे, इसमें ओबीसी को नहीं जोड़ा गया था। यूजीसी एक्ट 2026 में ओबीसी को भी जोड़ा गया है। एससी-एसटी छात्रों के खिलाफ जाति-भेदभाव के अलावा ये नियम अन्य आधारों जैसे धर्म, भाषा, जातीय, लिंग और दिव्यांगता पर भी लागू होते हैं, लेकिन सिर्फ सलाह के तौर पर-अनिवार्य नहीं।

शिकायत की व्यवस्था क्या है?

यूजीसी नियम 2012 के अनुसार, कैंपस के इक्विल अपॉर्च्यूनिटी सेल (EOC) को एसएससी-एसटी स्टूडेंट्स की शिकायतें सुनने की जिम्मेदारी दी गई थी। छात्रों के साथ होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव, बहिष्कार या सीमा जो छात्रों को शिक्षा से वंचित करे, खासकर जाति, धर्म, लिंक, दिव्यांगता के आधार पर जो भी शिकायतें हों, उन्हें ईओसी सुनेगा।

  • इन नियमों में बताए गए भेदभाव या उत्पीड़न के बारे में शिकायत कोई छात्र या छात्र का माता-पिता लिखित में कर सकता है, भले ही भेदभाव या उत्पीड़न उच्च शिक्षण संस्थान के अंदर या बाहर हुआ हो।
  • शिकायत में भेदभाव या उत्पीड़न के कथित घटना की पूरी जानकारी होनी चाहिए। शिकायत एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर को की जाएगी।
  • उच्च शिक्षण संस्थान ऐसी शिकायत दर्ज करने और उससे निपटने के लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया बनाएगा और अपनी वेबसाइट पर जानकारी अपलोड करके उसे सार्वजनिक करेगा।

 

दंड या कार्रवाई के नियम

2012 के नियम में के अनुसार, ईओसी छात्रों की शिकायतें सुन सकता है, लेकिन ये नियम कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं। शिकायत पर एंटी-डिस्क्रिमिनेशनल ऑफिसर जांच शुरू करता है। रिपोर्ट पर छात्रों के लिए यूजीसी 2009 रैंगिंग नियमों या अन्य नियमों के अनुसार और टीचर्स या स्टाफ के लिए सर्विल नियम के अनुसार संस्थान कार्रवाई कर सकता है। हालांकि कैंपस में सेल बनाना विश्वविद्यालय की मर्जी पर है। वह चाह तो सेल बनाए या न बनाए, शिकायत सुने या न सुने। दंड या कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं।

खुद को निर्दोष साबित करने के लिए 90 दिन

उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा बनाए गए प्रावधानों के अधीन, एंटी डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर द्वारा दिए गए किसी भी आदेश से पीड़ित कोई भी व्यक्ति उस आदेश की तारीख से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर उच्च शिक्षण संस्थान के प्रमुख के पास ऐसे आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है। बशर्ते कि उच्च शिक्षण संस्थान का प्रमुख 90 दिनों के अंदर होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है, अगर वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता के पास उन 90 दिनों की अवधि के भीतर अपील न करने की पर्याप्त वजह थी।

 

 

 
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