देहरादून: उत्तराखंड में चार धाम यात्रा 2026 की तैयारियों को पूरा कराया जा रहा है। इसको लेकर सरकार के स्तर पर तैयारियां चल रही है। इस बीच केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को देहरादून में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। दरअसल, पहले ही मंदिर समिति की ओर से मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाया गया था। इसको लेकर कई प्रकार के सवाल उठ रहे थे। मुस्लिम दुकानदारों को इन धामों के आसपास दुकान लगाने से रोकने का निर्णय आया था। अब बोर्ड की बैठक में इस संबंध में फैसला हुआ है।
बीकेटीसी बोर्ड की बैठक के बाद समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बैठक में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया गया। अगले माह शुरू होने जा रही चार धाम यात्रा के मद्देनजर बद्रीनाथ के लिए 57.47 करोड़ और केदारनाथ के लिए 63.60 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया। उन्होंने बताया कि बदरीनाथ के कपाट 23 अप्रैल, केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलेंगे।
अध्यक्ष ने बैठक के निर्णयों को लेकर बीकेटीसी अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन, रावल की नियुक्ति नियमावली और परंपराओं पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि अस्थायी कर्मचारियों के वेतन विसंगति दूर करने, मानदेय बढ़ाने, आदि बद्री मंदिर को बीकेटीसी में सम्मिलित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में पवित्र रूप छड़ी को बाहर भेजने और केदारनाथ के रावल की नियुक्ति का मामला भी उठा। पवित्र छड़ी को मंदिर से बाहर भेजने पर कड़ी नाराजगी जताई। बैठक में रावल नियुक्ति की प्रक्रिया को व्यवस्थित का निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि बीकेटीसी केदारनाथ में रावल की नियुक्ति की प्रक्रिया को बद्रीनाथ धाम के समान करने जा रही है। इसकी नियमावली को जल्द बनाया जाएगा।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि चार धाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ में एक तय सीमा में मोबाइल पर भी प्रतिबंध रहेगा। बद्रीनाथ में सिंहद्वार से आगे मोबाइल को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। वहीं, केदारनाथ में प्लाजा एवं संपूर्ण परिसर में मोबाइल को प्रतिबंधित करने पर सहमति बनी है।
बैठक में पारित बजट में श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सरल और सुगम दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने, यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में समिति का शिविर कार्यालय स्थापित करने तथा मंदिर परिसरों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।