संदीप तिवारी, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अहम बैठक संपन्न हुई। इस दौरान पार्टी प्रमुख मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक मजबूती और जनाधार विस्तार की रणनीति तय की। मंगलवार को हुई बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया गया कि पार्टी को जमीनी स्तर पर सक्रिय और प्रभावी बनाना होगा। इसके अलावा बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क खड़ा कर ही पार्टी को दोबारा सत्ता के करीब लाया जा सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को मेहनत, अनुशासन और निष्ठा के साथ काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना ही BSP की प्राथमिकता होनी चाहिए। आर्थिक और जमीनी मजबूती पर जोर देते हुए उन्होंने पार्टी फंडिंग और संसाधनों के पारदर्शी उपयोग की भी बात कही है। साथ ही जनाधार बढ़ाने के लिए गांव-गांव और शहर-शहर में सक्रिय संपर्क अभियान चलाने का आह्वान किया है।
इस दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन-यापन लागत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी, खासकर गरीब और मेहनतकश वर्ग की कमर तोड़ दी है। सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि BSP आगामी चुनाव में आपराधिक छवि वाले लोगों को टिकट नहीं देगी। प्रत्याशियों के चयन में सर्वसमाज के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे सभी वर्गों को बराबरी का अवसर मिल सके।
मायावती ने स्पष्ट किया कि पार्टी की राजनीति सामाजिक संतुलन और न्याय पर आधारित रहेगी। इसके अलावा 14 अप्रैल को डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर लखनऊ में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है। इस बार नोएडा के बजाय लखनऊ को कार्यक्रम का केंद्र बनाकर पार्टी ने प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता का संदेश देने की कोशिश की है।
आरक्षण के मुद्दे पर भी मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा है। उन्होंने महिला आरक्षण में कमजोर और पिछड़े वर्गों को उचित हिस्सेदारी देने की मांग उठाई और कहा कि बिना सामाजिक न्याय के कोई भी नीति अधूरी है।