देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के रिस्पना नदी किनारे बसी काठ बंगला कॉलोनी के 116 परिवारों को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने नोटिस जारी किया है। लोगों से तीन दिन के भीतर घर खाली करने को कहा गया है। इन सभी 116 परिवारों को देहरादून नगर निगम द्वारा बनाए गए हाउसिंग फ्लैट्स में शिफ्ट होने के लिए कहा गया है। वहीं, एमडीडीए द्वारा जारी नोटिस के बाद रिस्पना नदी किनारे बसे इन परिवारों में हड़कंप मच गया है।
एमडीडीए की ओर से रविवार को काठ बंगला कॉलोनी के इन 116 परिवारों के घरों के बाहर नोटिस चस्पा किया गया था, जिसमें कहा गया है कि सभी परिवारों को बुधवार तक नगर निगम द्वारा बनाए गए हाउसिंग फ्लैट्स में शिफ्ट होना है। जिसके बाद गुरुवार को काठ बंगला में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जानी है।
नोटिस में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आवास योजना के तहत नगर निगम द्वारा बनाए गए फ्लाइट आने वाले पात्र परिवारों को दिए गए हैं, इसकी जानकारी भी लोगों को दे दी गई है। हालांकि, इसके बावजूद कॉलोनी में अफरा-तफरी का माहौल है। नगर निगम आयुक्त नमामि बंसल का कहना है कि नगर निगम द्वारा बनाए गए हाउसिंग फ्लैट्स बनकर तैयार हैं। इनको बनने में देरी इसलिए हुई, क्योंकि जल संस्थान के साथ वार्ता चल रही थी, जिसमें समय लग गया। पर, अब यह समस्या सुलझा दी गई है।
वहीं, एमडीडीए उपाध्यक्ष वंशीधर तिवारी का कहना है कि रिस्पना किनारे बसी काठ बंगला कॉलोनी में रह रहे परिवारों को इससे पहले भी दो बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और उन्हें मकान खाली करने के लिए कहा जा चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इतनी जल्दी अपना घर छोड़कर फ्लैट्स में कैसे शिफ्ट हो सकते हैं।
बता दें कि नवंबर 2025 में भी कॉलोनी के लोगों को इस तरह का नोटिस जारी किया गया था और उन्हें 15 दिन का समय दिया गया था। रविवार को जारी नोटिस में कॉलोनी निवासियों को बताया गया है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के तहत नदी किनारे बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया जाना है। जिसके लिए एमडीडीए, नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन ने इन 116 परिवारों को नगर निगम द्वारा बनाए गए फ्लैट आवंटित किए हैं। इन फ्लैट्स में बिजली, पानी और सीवर जैसी व्यवस्थाएं पूरी कर दी गई हैं।
बता दें कि विगत वर्ष एमडीडीए ने काठ बंगला बस्ती में अवैध कब्जों पर कार्रवाई करते हुए जेसीबी से 26 मकान भी ध्वस्त कर दिए थे। जिसके बाद 100 और मकानों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी थी, लेकिन लोगों के आक्रोश को देखकर कार्रवाई को रोक लगा दी गई थी।