नैनीताल: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा कांड के मामले को कांग्रेस ने उठाया है। उत्तराखंड कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर कांड के मामलों के त्वरित निस्तारण और दोषियों को सजा देने के लिए राज्य सरकार से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की मांग की है। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने रविवार को नैनीताल उच्च न्यायालय परिसर में पत्रकारों से कहा कि इस कांड के तीन दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद दोषियों को सजा नहीं मिलना न्याय में देरी का उदाहरण है।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में महिलाओं के साथ गंभीर अत्याचार हुए और कई लोग शहीद हुए, लेकिन पीड़ित अब तक न्याय से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों आंदोलनकारी आज भी चिन्हिकरण और आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर पूर्व में आश्वासन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने महिला सशक्तिकरण, आरक्षण और हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है। दरअसल, चुनाव से पहले हर बार रामपुर तिराहा कांड चर्चा में आता रहा है।
मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा के पास उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर बर्बरता का मामला सामने आया था। घटना दो अक्टूबर 1994 को घटी थी। दरअसल, 1 अक्टूबर 1994 की रात उत्तराखंड से दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को रामपुर तिराहा के पास रोका गया। 2 अक्टूबर को पुलिस ने उन पर गोलीबारी कर दी। इसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। कई महिलाओं के साथ दुराचार की घटनाएं सामने आईं।
मामले की जांच 1995 में सीबीआई को सौंपी गई। 30 साल बाद मार्च 2024 में पहली बार इस मामले में दो पीएसी सिपाहियों मिलाप सिंह एवं वीरेंद्र प्रताप को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। 2020 में इस मामले को लेकर उत्तराखंड में एसआईटी गठन की मांग की गई थी।