नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और असम में बीजेपी की प्रचंड जीत सिर्फ दो राज्यों की चुनावी जीत नहीं है बल्कि ये राष्ट्रीय राजनीति में असर दिखाएगी। ये नतीजे चुनावी रणनीति और नेतृत्व की भूमिका को तो रेखांकित करते ही हैं साथ ही नतीजों ने ये भी साफ कर दिया है कि अभी भी मोदी फैक्टर भारतीय राजनीति में अहम फैक्टर बना हुआ है। साथ ही ये फैक्टर बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत भी है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बंगाल जीतने के साथ बीजेपी अपना अंग, बंग और कलिंग जीतने का लक्ष्य हासिल कर लेगी। अंग मतलब बिहार, बंग यानी बंगाल और कलिंग यानी ओडिशा। ज्यादा राज्यों में सरकार होने का साफ मतलब ये भी है कि राज्यसभा की राजनीति पर भी असर होगा।
असम में सत्ता की वापसी और पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत ने बीजेपी की स्थिति को पूर्व और पूर्वोत्तर में मजबूत किया है। यह विस्तार पार्टी के पैन इंडिया टारगेट को भी मजबूती देता है।
नतीजों ने साबित किया है कि नरेंद्र मोदी फैक्टर अब भी बरकरार है। उनकी रैलियां और वोटर्स से उनका कनेक्ट अब भी चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। कुल मिलाकर मोदी फैक्टर अब भी बीजेपी का सबसे बड़ा हथियार है। जब मुकाबला बहुकोणीय हो और विपक्ष बिखरा दिखे तो ये फैक्टर निर्णायक साबित होता है।
इन नतीजों ने फिर दिखाया है कि विपक्ष में एकजुटता की कमी है और विपक्ष अपना मजबूत नेरेटिव बनाने में असफल होता है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति की सीमाएं उजागर हुई हैं।
इन नतीजों का असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में तो दिख ही सकता है साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव तक भी बीजेपी अपना टैंपो बरकरार रखना चाहेगी। इस तरह की प्रचंड जीत बीजेपी का न सिर्फ मनोबल बढ़ाती है बल्कि यह भी दिखाती है कि बिना स्पष्ट नेतृत्व और मजबूत अजेंडा के बीजेपी का मुकाबला काफी मुश्किल है।
इन दो राज्यों की जीत ने बीजेपी के डबल इंजन सरकार के नेरेटिव को भी मजबूत किया है। लगातार कई विधानसभा चुनावों ने ये दिखाया है कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होते हुए लोगों ने राज्य स्तर पर भी उसी पार्टी पर भरोसा जताया है।