देहरादून: मां अपने बच्चे को जन्म भी देती है और अगर उसकी संतान को किसी ने नुकसान पहुंचाया तो दुनिया से भिड़ भी जाती है। बेटे के लिए मां के अद्भुत प्रेम का ऐसा ही मामला उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से आया है। एक सड़क हादसे में 18 वर्षीय युवक क्षितिज चौधरी की मौत हो गई। वर्ष 2024 में जहां 1742 एक्सिडेंट में एक हजार से अधिक मौत के मामले रिकार्ड किए गए हों, वहां एक युवक की डंपर से कुचलकर मौत की तफ्तीश कौन करे? देहरादून पुलिस ने पहले कार्रवाई की बात कही। बाद में जांच अधिकारी ने मामलों के दबाव का हवाला देते हुए 'जांच चल रही है' वाली बात कह दी। इसके बाद मां ने हार नहीं मानी। अपना इन्वेस्टिगेशन शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आखिरकार अपने बेटे के कातिल ड्राइवर का पता लगाने में कामयाब हो गई। अब पुलिस ने एक्शन की बात कही है।
देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित विश्वनाथ इन्क्लेव में ललिता चौधरी अपने 18 वर्षीय बेटे क्षितिज चौधरी के साथ रहती थी। क्षितिज 16 फरवरी 2024 को प्रेमनगर क्षेत्र में सुविधा स्टोर के सामने पैदल जा रहा था। इसी दौरान एक अज्ञात डंपर ने उसे कुचल दिया। इस घटना के बाद डंपर चालक मौके से फरार हो गया। दुर्घटना में बुरी तरह से घायल क्षितिज को अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक्सिडेंट के अगले दिन यानी 17 फरवरी 2024 को इलाज के दौरान क्षितिज की मौत हो गई। बेटे की मौत से मां ललिता चौधरी टूट गईं। उन्होंने पुलिस के समक्ष कार्रवाई की गुहार लगाई।
क्षितिज की मौत के बाद परिवार काफी दुखी थी। पुलिस ने परिजनों के बिना मामले की रिपोर्ट दर्ज करने से इनकार कर दिया। ललिता चौधरी इसके बाद भी नहीं मानीं। वह फूल चुगने के दिन फिर रोते-बिलखते थाने पहुंचीं। इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज किया गया। मां लगातार थाने में जाकर केस का हाल लेती रही। इसी क्रम में 21 फरवरी 2024 को उन्होंने मामले के जांच अधिकारी से बात की तो उन्हें हैरान करने वाला जवाब मिला।
जांच अधिकारी ने ललिता चौधरी से साफ कहा कि बिना नंबर के गाड़ी का पता लगाना संभव नहीं है। जांच अधिकारी ने दो टूक कहा कि मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जो मैं इस मामले में इस मामले में कार्रवाई करूं।
ललिता चौधरी बेटे की मौत से टूटी हुई थीं। वहीं, पुलिस के रवैये ने उन्हें झकझोड़ दिया। उन्होंने बेटे की मौत के बाद पुलिस के रवैये को अमानवीय करार दिया। आखिरकार, पुलिस ने सड़क हादसे के मामले में बिना गहन जांच के ही केस को बंद कर दिया। मामले में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी गई। इसके बाद मां ने बेटे को इंसाफ दिलाने की मुहिम पर काम करना शुरू किया।
"मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं। हमने तमाम सबूतों को देखने के बाद निर्णय लिया है। मामले में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रमेंद्र डोबाल, देहरादून एसएसपी"
बेटे के प्रेमनगर इलाके में सुविधा स्टोर के पास हुई घटना के बाद ललित चौधरी गम में थीं। पुलिस की कार्यप्रणाली ने उन्हें अंदर तक झकझोरा। इसके बाद उन्होंने मामले की खुद तफ्तीश शुरू की। पेशे से ब्यूटीशियन ललिता चौधरी महीनों तक सड़कों पर भटकीं। उन्होंने क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। 10 संदिग्ध गाड़ियों के नंबर पुलिस को उपलब्ध कराए। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। करीब डेढ़ साल के संघर्ष के बाद उन्होंने उस डंपर चालक का पता लगा लिया।
ललिता का कहना है कि हमने अज्ञात वाहन और उसके मालिक अंकित चौहान का पता लगाया। इसके बाद शनिवार को वह तमाम सबूतों के साथ देहरादून एसएसपी कार्यालय में पहुंचीं। वहां उन्होंने बेटे की मौत मामले में तमाम सबूत एसएसपी को सौंपे।
मां की इस प्रकार से बेटे की मौत के बाद किए गए प्रयासों को देखकर एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल भी हैरान रह गए। पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद उन्होंने केस में दाखिल फाइनल रिपोर्ट को दरकिनार किया। मामले की एक बार फिर जांच के आदेश दे दिए। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल का कहना है कि घटना के आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।