देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कांग्रेस से अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है। एक मीडिया संस्थान के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे उनके आग्रह पर भी संजय नेगी को पार्टी में शामिल नहीं कराया गया, जिससे वह आहत हुए। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :
हम लोकतांत्रिक पार्टी हैं। हमें अपनी बात रखने की आजादी है। लेकिन, कभी-कभार विवाद हो जाते हैं। जहां तक चुनाव की बात है तो हम एकजुट होकर काम करेंगे और पार्टी को जिताएंगे।
मुझे उन समितियों में रहना ही नहीं था। मैं यह जरूर चाहता था कि मेरे कुछ लोग उसमें रहें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मुझे अब भी लगता है कि कुछ लोगों को शामिल किया जाएगा।
ऐसा कुछ नहीं है। उनकी बातों को मीडिया ने तोड़-मरोड़कर पेश किया। उन्होंने पार्टी छोड़ने की नहीं, बल्कि समर्थन जुटाने की बात कही थी। चूंकि वह मेरे साथ रहे हैं और काफी करीब से मेरा कामकाज देखा है, इसलिए उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की।
मैं रामनगर के संजय नेगी को शामिल कराना चाहता था। इसके लिए मैंने प्रदेश के सभी पदाधिकारियों सहित अपनी बहन व प्रदेश की केंद्रीय प्रभारी कुमारी शैलजा तक से भेंट की, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसका मुझे दुख है।
सवाल ही नहीं है। उनमें से 3 को तो मैंने ही कांग्रेस में आने के लिए प्रेरित किया था। पार्टी में आने के बाद वे मुझसे मिलने भी आए।
मैंने भी पार्टी की सेवा की है। मैं आज भी पार्टी के हर फैसले में साथ हूं। मैं कह चुका हूं कि अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए। मुझे अब न तो कोई पद और न ही टिकट चाहिए। लेकिन, मैं पार्टी को सत्ता में लाने के लिए दिन-रात काम करूंगा। अगर पार्टी को मेरी जरूरत नहीं है, तो मुझे सम्मानपूर्वक विदाई दे दी जानी चाहिए। पार्टी कहेगी तो मैं घर बैठ जाऊंगा।
सभी जानते हैं कि उन्होंने पार्टी और सरकार के साथ क्या किया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उन्हें दोबारा लाने के लिए मुझसे काफी आग्रह किया। उनके कहने पर ही मैंने पुरानी बातें भुला दी। पार्टी की जीत के लिए मैं अब भी उनके साथ हूं, लेकिन उनके बयान से विवाद हो रहा है। वह अब मुझ पर ही निशाना साध रहे हैं।
मुझ पर तो आरोप है कि 2017 और 2022 के चुनाव में मेरी अगुवाई में हार हुई। मैंने इसकी जिम्मेदारी भी ले ली। लेकिन, किसी ने यह नहीं देखा कि हार के बावजूद वोट शेयर बढ़ा। हम भले चुनाव नहीं जीते, लेकिन हमारा जनाधार कमजोर नहीं हुआ।