देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से देश की राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाली दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का आज उद्घाटन होने जा रहा है। प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। एक्सप्रेसवे दिल्ली से देहरादून की दूरी को महज ढाई घंटे में पूरा कराने में सफल होगा। इस एक्सप्रेसवे के लोकार्पण से पहले इसकी खासियतों पर चर्चा शुरू हो गई है। इसमें सहारनपुर से देहरादून के बीच बने वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की खूब चर्चा हो रही है। इस कॉरिडोर के नीचे से जंगली जानवरों को पार करते पिछले दिनों देखा गया। इस कॉरिडोर का उद्देश्य जंगली जीवों के स्वच्छंद विचरण में किसी प्रकार की बाधा न पड़ने देना है। यह वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर एशिया में सबसे बड़ा है।
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना वाइल्डलाइफ कॉरिडोर 12 किलोमीटर लंबा है। एशिया के सबसे लंबे वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में दो एलिफेंट अंडर पास का निर्माण किया गया है। इसके अलावा यहां छह एनिमल अंडरपास बने हुए हैं। साथ ही, एक्सप्रेसवे पर डाटकाली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग का भी निर्माण किया गया है। यह इस एक्सप्रेसवे को खास बनाता है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर वन्य जीवों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में काम करेगा। इसके कारण सड़क पर वन्य जीवों के आने की संभावना न के बराबर होगी। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने वन मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान इस कॉरिडोर की खासियतों पर चर्चा की। मंत्री ने कहा कि 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक रेंज और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व एवं देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।
वन मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के तहत वन भूमि के हस्तांतरण के बाद व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया गया है। परियोजना के कारण कटे पेड़ों को देखते हुए कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक पौधरोपण कराया गया है। इसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमिटी के निर्देशन में 40 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्य जीव सरंक्षण के लिए इको रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी कराए गए हैं। मंत्री ने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी।
वन मंत्री ने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना के पूरा कराए जाने के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी। बाद में वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ कटने से बच गए। वन मंत्री का कहना है कि इस परियोजना को पूरा कराने के लिए 11,160 पेड़ों को काटना पड़ा। इसके समकक्ष पौधरोपण के कार्य भी कराए गए हैं।