ज्योर्तिमठ: बद्रीनाथ धाम में 6 महीने मनुष्यों और 6 महीने देवताओं द्वारा भगवान बद्री विशाल की पूजा का विधान है। ऐसे में शीतकाल के 6 महीने भगवान बद्री विशाल के कपाट पूर्णतया बंद रहते हैं और नारायण की पूजा का अधिकार देवताओं को होता है। अभी भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने में समय है। इसी बीच बद्रीनाथ धाम में सेना द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिस पर तीर्थ पुरोहितों सहित मंदिर के हकहकूक धारीयों ने विरोध दर्ज किया।
तीर्थ पुरोहित उमेश सती सहित पूर्व धर्म अधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बद्रीनाथ धाम में हुए इस कार्यक्रम पर अपनी आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने से पहले किसी भी प्रकार का आयोजन बद्रीनाथ धाम में होना मान्यताओं के खिलाफ है। उनका कहना है कि भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने के अवसर पर ही गाजे बाजे के साथ धाम मे सबसे बड़ा उत्सव मनाया जाता है। इससे पूर्व वहां पर किसी भी प्रकार का आयोजन करना मान्यताओं के खिलाफ है।
बद्रीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इस कार्यक्रम के लिए जिस भी माध्यम से अनुमति प्रदान की गई हो। जवाबदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। पुरोहितों का कहना है कि भगवान बद्री विशाल के कपाट खुलने से पूर्व यह पहली दफा है। जब इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन हुआ हो। उनका कहना है कि आगे से इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन ना हो सके। इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।