देहरादून: एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार की बेटी ने आज जब अपने हक के लिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के सामने आवाज उठाई तो उसकी बात सुनने की बजाय उसे कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया। उत्तराखंड की यह बेटी कांग्रेस पार्टी की इस कार्रवाई से हैरान तो है, लेकिन निराश नहीं हैं। उनका कहना है कि वे कांग्रेस की एक समर्पित कार्यकर्ता हैं और हमेशा एक कार्यकर्ता के रूप में समाजहित में काम करती रहेंगी।
भावना नगरकोटी, जो मंगलवार शाम तक पिथौरागढ़ में कांग्रेस की जिलाध्यक्ष थीं, ने महिलाओं की अनदेखी किए जाने पर आवाज उठाई तो उनके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई। मंगलवार को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल पिथौरागढ़ में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए शुरू किए गए परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में पहुंचे तो यहां पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी भी सामने आ गई।
सम्मेलन के दौरान पिथौरागढ़ महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष ने अपनी बात उनके समक्ष रखी। अपने संबोधन के दौरान विधायक मयूख महर के प्रति नाराजगी जताते हुए भावना नगरकोटी ने कहा कि महिलाओं को पीछे छोड़ा गया है तो महिलाओं को पद क्यों दिए जाते हैं? इसका मतलब यही चाहते हैं कि महिलाएं केवल झंडा-डंडा उठाएं और दरियां बिछाएं, लेकिन घर बैठे एक प्रत्याशी की पत्नी को लाकर चुनाव में टिकट देकर हमसे उसको जिताने की अपेक्षा की जाती है। जिन लोगों ने पार्टी के साथ बगावत की, पार्टी के झंडे जलाए, चार साल पार्टी को खूब कोसा और पांचवें साल उसने टिकट मांगते हैं।
महिलाएं अपने बच्चों को छोड़कर पार्टी के साथ खड़ी हैं, लेकिन तब भी उनकी उपेक्षा की जाती है। भावना के संबोधन के दौरान ही सभागार में हंगामा हो गया और विधायक मयूख महर वहां से सभा का बहिष्कार करते हुए चले गए, जबकि कई कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष के सामने ही विधायक के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।
नवभारतटाइम्स ऑनलाइन से फोन पर हुई बातचीत में भावना नगरकोटी ने बताया कि जब पार्टी के पदाधिकारी हमें काबिल नहीं समझते हैं तो हमें पद दिए ही क्यों? जब प्रदेश अध्यक्ष को यहां पर पार्टी की गुटबाजी के बारे में पता था तो उन्होंने सबको एक साथ बुलाया ही क्यों? निकाय चुनाव में पार्टी के खिलाफ बोलने वालों पर ही पार्टी भरोसा जता रही है। उनका कहना है कि उन्होंने सम्मेलन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी थी, लेकिन पार्टी ने उनको नोटिस थमा दिया, जबकि निकाय चुनाव में बगावत करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। निकाय चुनाव में 25 साल बाद महिला सीट आई और इसीलिए उन्होंने मेयर पद के लिए दावेदारी की थी, लेकिन उनको हाशिए पर रखा गया।
भावना नगरकोटी ने बताया कि उनके साथ महेंद्र सिंह लुंठी और दीपक लुंठी को भी नोटिस दिया गया है। कांग्रेस द्वारा संभावित कार्रवाई किए जाने पर उनका अगला कदम क्या होगा, यह पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि वे पार्टी में रहे या ना रहें, समाजहित में काम करती रहेंगी।
"मैं सोर घाटी की सोरयानी हूं, अपने दम पर विधायक बन कर आ सकती हूं।
भावना नागरकोटी"
भाजपा में जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके बड़े दादाजी स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी कई पुश्तें कांग्रेस विचारधारा से जुड़ी रही हैं तो वे भी इसी विचारधारा को मानती हैं। वे भाजपा की विचारधारा से सहमत नहीं हैं तो उनके साथ जाने का सवाल ही नहीं उठता है। वे कांग्रेस में ब्लॉक अध्यक्ष, जिला महामंत्री, प्रधान, सभासद और जिलाध्यक्ष पद संभाल चुकी हैं। भावना नगरकोटी ने इंग्लिश और योगा से डबल एमए किया हुआ है। भरे-पूरे परिवार से जुड़े होने के बावजूद पार्टी की एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही हैं। वहीं, दूसरी ओर प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने पिथौरागढ़ में परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए पिथौरागढ़ जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है।
भावना नगरकोटी की पैदाइश पिथौरागढ़ के डीडीहाट के हिन्दू ब्राह्मण परिवार की है। उनका जन्म 10 जून 1989 को हुआ है। उनके पति का नाम भूपेश नगरकोटी है और दौला वार्ड पिथौरागढ़ की निवासी हैं। भावना कांग्रेस में वर्ष 2010 से जुड़ी हुई हैं और इस दौरान उन्होंने पार्टी से लगभग 500 लोगों को सदस्य के तौर पर जोड़ा है। ब्लॉक बिण की ब्लॉक अध्यक्ष रह चुकी हैं। वर्ष 2019 में कांग्रेस की जिला महामंत्री रहीं और 2023 से जिलाध्यक्ष के तौर पर कार्य कर रही हैं।