देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि 'ड्राइवर से शराब की महक आना ड्रंक ड्राइविंग का आरोप साबित करने के लिए काफी नहीं है, क्योंकि इससे सिर्फ शराब पीने का पता चलता है, नशे की हालत का नहीं।' कोर्ट ने कहा कि 'गैर-इरादतन हत्या का आरोप लगाने से पहले वैज्ञानिक सबूत, जैसे ब्रेथलाइजर या ब्लड अल्कोहल टेस्ट, जरूरी हैं।'
जस्टिस आलोक महरा ने चमोली के रहने वाले अमर सिंह की क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत लगे आरोप को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने धारा 125(ए) (चोट पहुचाना), 125(बी (गंभीर चोट पहुंचाना) और 281 (तेज या लापरवाही से गाड़ी चलाना) के तहत आरोपों को बरकरार रखा और ट्रायल कोर्ट को मामले में तेजी से आगे बढ़ने का निर्देश दिया।
यह मामला चमोली में हुए एक एक्सीडेंट से जुड़ा है। इसमें बद्रीनाथ से आ रही अमर सिंह की गाड़ी का टायर फटने के बाद वह पलट गई थी। इस हादसे में एक यात्री की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। इस मामले में अमर सिंह पर गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाया गया था।
चमोली की अदालत ने अमर सिंह पर बीएनएस की कई धाराओं के तहत आरोप तय किए थे, जिसमें धारा 105 भी शामिल थी। आरोप यह था कि एक्सीडेंट के समय वह शराब के नशे में गाड़ी चला रहे थे। हालांकि, सबूतों और जांच की समीक्षा के बाद हाई कोर्ट ने धारा 105 के तहत लगे आरोप को अमान्य पाया। कोर्ट ने टेक्निकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों पर भरोसा किया। इन सबसे यही संकेत मिला कि नशे का कोई लक्षण नहीं था और अमर सिंह पूरी यात्रा के दौरान ठीक से गाड़ी चला रहे थे।
हाई कोर्ट ने गौर किया कि भले ही मेडिकल रिपोर्ट में शराब की गंध का जिक्र था, लेकिन नशे की हालत को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए कोई ब्रेथलाइजर या ब्लड अल्कोहल टेस्ट नहीं किया गया था। इससे उलट टेक्निकल इंस्पेक्शन रिपोर्ट में टायर फटने को ही एक्सीडेंट का मुख्य कारण बताया गया था।