मसूरी: पर्यटन नगरी मसूरी में पिछले कई महीनों से चल रहे रेहड़ी-पटरी (स्ट्रीट वेंडिंग) विवाद पर अब कानूनी विराम लग गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद मसूरी की वेंडिंग व्यवस्था को नियमों के अनुरूप मानते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि अब शहर में स्ट्रीट वेंडिंग केवल निर्धारित वेंडिंग जोन और वैध लाइसेंस के आधार पर ही संचालित होगी। इससे नगर पालिका को बड़ी कानूनी राहत मिली है और अव्यवस्थित वेंडिंग पर सख्ती का रास्ता भी साफ हो गया है।
मामला तब शुरू हुआ जब रेहड़ी-पटरी कमजोर वर्ग कल्याण समिति ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) के गठन पर सवाल उठाए। याचिका में नए सिरे से सर्वे कराने और माल रोड सहित अन्य क्षेत्रों में फड़-फेरी की अनुमति देने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद ने अदालत को बताया कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए टाउन वेंडिंग कमेटी का पुनर्गठन किया गया। पात्र वेंडरों का सर्वे कराया गया, उन्हें लाइसेंस जारी किए गए और उनके लिए अलग-अलग वेंडिंग जोन भी तय किए गए।
नगर पालिका द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर संतुष्ट होते हुए हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं की शिकायतों का समाधान नियमानुसार किया जा चुका है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया। पालिका प्रशासन ने इसे अपनी कार्यप्रणाली पर न्यायिक मुहर बताया है।
मसूरी में लंबे समय से पर्यटन, यातायात और रेहड़ी-पटरी व्यवसाय के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती रहा है। पालिका का कहना है कि अब वेंडिंग व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे और शहर की सुंदरता व यातायात व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानून के अनुरूप अपनाई गई थी। उन्होंने लाइसेंसधारी वेंडरों से अपील की कि वे केवल निर्धारित वेंडिंग जोन में ही व्यवसाय करें, जिससे यातायात और पर्यटन गतिविधियां सुचारु बनी रहें।
'रोजगार भी सुरक्षित रहेगा, शहर भी व्यवस्थित बनेगा'
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि नगर पालिका का उद्देश्य किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि विकास और आजीविका के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि मसूरी की पहचान देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में है, इसलिए स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, यातायात व्यवस्था और वेंडरों के अधिकारों को साथ लेकर आगे बढ़ना जरूरी है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नगर पालिका को वेंडिंग व्यवस्था लागू करने में कानूनी मजबूती मिल गई है। ऐसे में बिना लाइसेंस या निर्धारित वेंडिंग जोन के बाहर रेहड़ी-पटरी लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। वहीं लाइसेंसधारी वेंडरों को भी तय स्थानों पर ही व्यवसाय करना होगा। माना जा रहा है कि यह फैसला मसूरी की यातायात व्यवस्था, पर्यटन प्रबंधन और शहरी अनुशासन को नई दिशा देगा।