ज्योर्तिमठ: उत्तराखंड में ज्योर्तिमठ के पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में भूस्खलन की घटना के चार दिन बाद भी लोगों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। हादसे में अब तक आठ श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 श्रमिकों को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया था। दो अन्य लोगों की तलाश अभी जारी है। हादसे के बाद टीएचडीसी की ओर से मृतकों के परिजनों को 5 लाख और घायलों को 1 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कामगारों और मृतक श्रमिकों के परिजनों में नाराजगी है।
रविवार को स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ टीएचडीसी में काम करने वाले कामगारों ने कंपनी का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने मृतकों और घायलों के लिए घोषित मुआवजा राशि को नाकाफी बताया और कंपनी के सामने अपनी मांगें रखीं।
कामगारों और स्थानीय लोगों की मांग है कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके साथ ही मृतक श्रमिकों के बच्चों की आजीवन पढ़ाई का खर्च भी कंपनी उठाए।
पीपलकोटी हाट गांव के पूर्व प्रधान राजेंद्र हटवाल ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के लिए 5 लाख रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन श्रमिकों की मौत हुई है, उनके परिवारों और गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को कंपनी की ओर से एक करोड़ रुपये की सहायता दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से घायल श्रमिकों को भी कम से कम 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, ताकि हादसे के बाद उनके परिवारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
स्थानीय लोगों और कामगारों ने केवल आर्थिक मुआवजे की मांग ही नहीं की है। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने हादसे में अपना कमाने वाला सदस्य खोया है, उनके बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी भी कंपनी को उठानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मृतक श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा का खर्च कंपनी आजीवन वहन करे, ताकि हादसे का असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर न पड़े।
कामगारों ने टीएचडीसी पर सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही के आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि निर्माणाधीन टनल में पिछले काफी समय से मलबा और पानी आने की समस्या बनी हुई थी।
टनल में काम करने वाले मजदूरों अंकुश, कुलदीप, रजत और विजय कुमार के मुताबिक, हादसे से तीन-चार दिन पहले से ही टनल के भीतर पानी आ रहा था और लूज मलबा गिर रहा था। उनका दावा है कि इसकी जानकारी वहां मौजूद अधिकारियों को भी दी गई थी।
श्रमिकों का आरोप है कि खतरे की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से समय रहते कोई प्रभावी निर्णय नहीं लिया गया। इसी वजह से हादसा हुआ और कई श्रमिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पीपलकोटी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद अब निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। श्रमिकों का कहना है कि अगर टनल में पानी और मलबा आने की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाती और खतरे वाले हिस्से में काम रोक दिया जाता, तो हादसे को टाला जा सकता था।