देहरादून: बारिश हो रही थी। मैदान कीचड़ से भर चुका था। जगह-जगह फिसलन थी, लेकिन देहरादून के बन्नू स्कूल ग्राउंड में मौजूद हजारों युवाओं के उत्साह पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा था। राजनीतिक रैलियों के पारंपरिक नारे यहां लगभग गायब थे। उनकी जगह तेज आवाज में बॉलीवुड और पंजाबी गाने गूंज रहे थे। सामने मौजूद भीड़ संगीत पर झूम रही थी, मोबाइल कैमरों से वीडियो बना रही थी और मंच पर मौजूद एंकर लगातार युवाओं का उत्साह बनाए रखने में जुटा था।
पहली नजर में यह किसी राजनीतिक सभा से ज्यादा किसी युवा संगीत महोत्सव जैसा लग रहा था। कांग्रेस की छात्रों की गूंज रैली में पार्टी ने साफ तौर पर जेन-Z की भाषा, पसंद और शैली अपनाने की कोशिश की। कार्यक्रम शुरू होने से पहले लगातार बॉलीवुड के लोकप्रिय गाने बजते रहे। बीच-बीच में एंकर छात्रों से हाथ उठाने, मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाने और संगीत की धुन पर तालियां बजाने की अपील करता रहा। मंच के पीछे लगी विशाल एलईडी स्क्रीन पर लगातार नारे उभर रहे थे 'सिस्टम वीक, पेपर लीक' और 'लीक पर लीक, सरकार अस्लीप'।
देहरादून में लगातार बारिश के कारण मैदान पूरी तरह कीचड़ में बदल चुका था। कई जगह लोग फिसल रहे थे, लेकिन भीड़ अपनी जगह पर डटी रही। बड़ी संख्या में छात्र बारिश में भीगते हुए भी कार्यक्रम का इंतजार करते रहे। आयोजकों का पूरा फोकस युवाओं को कार्यक्रम से जोड़े रखने पर था। पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से पहले माहौल को मनोरंजन के जरिए तैयार किया गया।
करीब शाम को 8 बजे जब राहुल गांधी कार्यक्रम स्थल पहुंचे तो उनकी एंट्री किसी पारंपरिक राजनीतिक नेता जैसी नहीं थी। तेज संगीत बजा, एंकर ने पूरे मैदान से मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाने की अपील की और कुछ ही सेकंड में पूरा मैदान हजारों चमकती रोशनियों से जगमगा उठा। राहुल गांधी मंच के बीच में पहुंचने तक लगातार युवाओं का अभिवादन करते रहे।
यह एंट्री साफ तौर पर युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। मंच संचालन, बैकग्राउंड म्यूजिक और विजुअल्स, सब कुछ सोशल मीडिया और रील्स की पीढ़ी को आकर्षित करने वाली शैली में डिजाइन किया गया था।
मंच पर आते ही राहुल गांधी ने शुरुआत राजनीतिक भाषण की बजाय एक शिक्षक की तरह की। उन्होंने कहा कि वह चुनावी सभा करने नहीं, बल्कि छात्रों से चर्चा करने आए हैं। करीब दो घंटे तक उन्होंने पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और रोजगार के मुद्दे पर विस्तार से बात की।
उन्होंने 10 स्लाइड की एक प्रस्तुति दिखाई और कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पांच में से चार रास्ते विनिर्माण, उद्यमिता, निजी क्षेत्र की नौकरियां और सार्वजनिक क्षेत्र लगभग बंद हो चुके हैं। उनके मुताबिक, अब अधिकांश युवाओं के सामने सिर्फ सरकारी नौकरी का विकल्प बचा है और पेपर लीक जैसी घटनाएं उसी उम्मीद को भी कमजोर कर रही हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि देश की परीक्षा व्यवस्था अब छात्रों की मेहनत से ज्यादा पैसों पर निर्भर होती जा रही है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली की तुलना रेस्तरां के मेन्यू कार्ड से करते हुए कहा कि जैसे मेन्यू में हर चीज की कीमत तय होती है, वैसे ही आज परीक्षा प्रणाली में भी पैसे के दम पर सब कुछ हासिल किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में बड़ी संख्या में पेपर लीक हुए, करोड़ों छात्र प्रभावित हुए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई बेहद सीमित रही।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब कुछ छात्रों को मंच पर बुलाया गया। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, पेपर लीक और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के अपने अनुभव साझा किए।
एक छात्रा के पिता ने अपनी बेटी की आत्महत्या का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों की मेहनत पेपर लीक की वजह से बेकार चली गई। पूरा मैदान कुछ देर के लिए शांत हो गया। पिता के भावुक होने पर राहुल गांधी ने उन्हें गले लगाया।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत को 21वीं सदी की परीक्षा प्रणाली अपनानी होगी। उन्होंने सुरक्षित प्रश्न बैंक, यादृच्छिक प्रश्नपत्र, लचीली परीक्षा व्यवस्था और छात्र-केंद्रित मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की वकालत की।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस समय दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का आंदोलन राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है, राहुल गांधी ने अपने पूरे संबोधन में उनका नाम नहीं लिया।
देहरादून की यह रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति की झलक भी थी। पार्टी ने पारंपरिक नारों और लंबे भाषणों की जगह मनोरंजन, संगीत, विजुअल इफेक्ट्स और सोशल मीडिया फ्रेंडली प्रस्तुति के जरिए युवाओं तक पहुंचने की कोशिश की।
बारिश, कीचड़ और फिसलन के बीच भी अगर हजारों छात्र अंत तक डटे रहे तो इसकी बड़ी वजह सिर्फ राहुल गांधी का भाषण नहीं, बल्कि पूरे कार्यक्रम की प्रस्तुति भी थी, जिसे साफ तौर पर जेन Z की पसंद और उनकी डिजिटल दुनिया को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।
दिलचस्प यह भी रहा कि उसी दिन देहरादून में युवाओं के बीच लोकप्रिय गायिका जैस्मिन सैंडलस का भी एक अलग कार्यक्रम आयोजित था। इसके बावजूद राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने कांग्रेस नेताओं का उत्साह बढ़ाया।