देहरादून: गौरीकुंड से 11755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ तक का 18 किलोमीटर का ट्रेक ज्यादातर तीर्थयात्रियों के लिए शांति और सुकून की तलाश में जीवन भर की एक यादगार यात्रा होती है। लेकिन अब सेवा के एक अनोखे काम के तहत हजारों लोग केदारनाथ से इकट्ठा किए गए प्लास्टिक के कचरे के बैग को लेकर लौट रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन की 'कैरी मी बैक' पहल के तहत, अब तक लगभग 5000 तीर्थयात्रियों ने अपनी मर्जी से 12 टन से ज्यादा प्लास्टिक का कचरा नीचे पहुंचाया है। कचरे की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए शुरू की गई यह स्थानीय कोशिश अब एक बड़े अभियान में बदल गई है। यह कदम तीर्थ स्थल पर साफ-सफाई की गंभीर चुनौती को देखते हुए उठाया गया है, जहां बड़ी संख्या में आने वाले यात्रियों की वजह से बहुत ज्यादा कचरा जमा हो जाता है। कचरे को ठीक से अलग न कर पाना, मुश्किल मौसम और इतनी ऊंचाई पर काम करने में आने वाली लॉजिस्टिकल दिक्कतें इन सभी समस्याओं को और बढ़ा देती हैं।
इस पूरी पहल को सोशल मीडिया से काफी मदद मिली है। इस अभियान के दौरान तमिलनाडु, ओडिशा और दूसरे दक्षिणी राज्यों से आए तीर्थयात्रियों को साइकिल पर 10 किलो तक कचरा ले जाते हुए देखा गया। मदन लाल, जिनका एक हाथ कटा हुआ था, उन्होंने अपने ठीक हाथ से कचरे से भरा एक बैग गौरीकुंड तक पहुंचाया।
वहीं, गुड़गांव में काम करने वाली अंकिता सिंह अपने दो दोस्तों के साथ 8 किलो कचरा वापस लाईं। उन्होंने कहा कि जब हम गुड़गांव से निकले थे, तो हमारी योजनाएं अलग थीं और उनमें केदारनाथ शामिल नहीं था। हालांकि, हम आखिरकार यहां पहुंच गए। हमारा मानना है कि इस जगह तक पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं था और इस नेक पहल का हिस्सा बनकर हमें एक तरह की ईश्वरीय खुशी का अनुभव हुआ।