देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर टोल की अत्यधिक वसूली पर सवाल उठाया है। उन्होंने एक्सप्रेसवे पर पांच टोल प्लाजा स्थापित किए जाने पर भी सवाल किया है। उन्होंने कहा है कि टोल का भार कम किया जाना चाहिए।
दो-तीन साल में ही पूरा पैसा वसूल करेंगे?
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है कि, 'देहरादून को दिल्ली से जोड़ने के लिए एक एक्सप्रेसवे बनाया गया, अच्छी बात है। हम भी इसका आनंद उठा रहे हैं। मगर तकलीफ की बात यह है कि लगभग 190 किलोमीटर की बॉर्डर-टू-बॉर्डर दूरी के बीच में पांच टोल प्लाजा हैं। तो आखिर क्या नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने यह तय कर लिया है कि दो-तीन साल के अंदर ही हमको पूरा पैसा वसूल कर लेना है?'
उन्होंने लखा है कि, 'बहुत सारे लोग इस एक्सप्रेस-वे का फायदा उठाना चाहते थे। लेकिन इन टोल प्लाजाओं के कारण वे अपने पुराने ही मार्ग को अपनाना पसंद कर रहे हैं। मेरा मानना है कि इस एक्सप्रेसवे पर ज्यादा से ज्यादा तीन टोल प्लाजा होने चाहिए। यह उपभोक्ताओं पर एक भार है, इसे कम किया जाना चाहिए।'
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर कुल 5 टोल प्लाजा हैं। इस पूरे एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान कुल 5 जगहों पर टोल देना होता है। दिल्ली में अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक लगभग 18 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह टोल फ्री है। दिल्ली से देहरादून तक कार सहित अन्य हल्के वाहनों के लिए एक तरफ का टोल लगभग 675 रुपये निर्धारित है। चौबीस घंटे के भीतर वापसी यात्रा के लिए कुल 1010 रुपये टोल लगता है। टोल कलेक्शन पूरी तरह से फास्टैग (FASTag) के माध्यम से स्वचालित रूप से किया जाता है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे छह लेन का है और यह अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। इस एक्सप्रेसवे से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बीच यात्रा का समय छह घंटे से घटकर लगभग ढाई घंटे हो गया है।