कम उम्र में बाल सफेद होना कई लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कुछ लोगों में यह बदलाव धीरे-धीरे होता है, जबकि कुछ लोगों को कम उम्र में ही सफेद बाल दिखाई देने लगते हैं। बालों का रंग मेलेनिन पिगमेंट से आता है और जब बालों की जड़ों में इसे बनाने वाली कोशिकाएं कम सक्रिय होती हैं तो नए बाल सफेद या ग्रे दिखाई दे सकते हैं।
बालों का प्राकृतिक रंग मेलेनिन की मात्रा और प्रकार पर निर्भर करता है। उम्र बढ़ने के साथ बालों के फॉलिकल्स में मेलेनिन का उत्पादन धीरे-धीरे कम हो सकता है। यही सामान्य रूप से उम्र से जुड़े सफेद बालों का मुख्य कारण है। लेकिन अगर यह प्रक्रिया कम उम्र में शुरू हो जाए तो इसके पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं। अगर परिवार में माता-पिता या अन्य करीबी रिश्तेदारों के बाल जल्दी सफेद हुए हैं तो किसी व्यक्ति में भी ऐसा होने की संभावना ज्यादा हो सकती है।
इसलिए कम उम्र में बाल सफेद होने के कारण समझते समय केवल उम्र को देखना काफी नहीं है। परिवार का इतिहास, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य कारण भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कुछ पोषक तत्वों की कमी को समय से पहले बाल सफेद होने के साथ जोड़ा गया है। इनमें विटामिन B12, आयरन, फोलेट और कुछ अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शामिल हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति के सफेद बाल किसी विटामिन की कमी के कारण होते हैं। बिना जांच के सप्लीमेंट लेना भी सही तरीका नहीं है। यदि किसी व्यक्ति में वास्तविक कमी है तो उसे पहचानकर उपचार करना ज्यादा उपयोगी होता है।
संतुलित आहार में दालें, हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना सामान्य स्वास्थ्य और बालों के लिए अच्छा आधार प्रदान करता है।
तनाव और सफेद बालों के बीच संबंध पर अक्सर चर्चा होती है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि गंभीर तनाव बालों के पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है। फिर भी हर तनावपूर्ण स्थिति के बाद बाल सफेद हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है। बालों के रंग पर आनुवंशिक और उम्र से जुड़े कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव होता है।
तनाव को नियंत्रित करना नींद और सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है लेकिन इसे सफेद बालों को रोकने का तरीका नहीं मानना चाहिए।
एक बार बालों के फॉलिकल में मेलेनिन का उत्पादन काफी कम होने के बाद उसे सामान्य रूप से वापस लाना आसान नहीं होता। वर्तमान में ऐसा कोई भरोसेमंद तरीका नहीं है जो उम्र से जुड़े सफेद बालों को लगातार और स्थायी रूप से फिर से काला कर सके।
अगर सफेद बाल किसी पोषण संबंधित कमी या किसी अन्य उपचार योग्य कारण से जुड़े हैं तो उस कारण का उपचार आगे होने वाले बदलावों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन पहले से सफेद हो चुके बालों को तुरंत प्राकृतिक रंग में वापस लाने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
बालों को रंगने वाले उत्पाद सफेद बालों की उपस्थिति को छिपा सकते हैं लेकिन वे बालों के फॉलिकल में मेलेनिन का उत्पादन मजबूत नहीं करते।
कुछ सफेद बाल सामान्य हो सकते हैं लेकिन बहुत कम उम्र में बड़ी संख्या में बाल तेजी से सफेद हो रहे हों तो डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। यदि सफेद बालों के साथ बाल झड़ना, त्वचा में बदलाव, ज्यादा थकान या अन्य स्वास्थ्य संबंधित लक्षण भी मौजूद हों तो किसी आंतरिक कारण की जांच कराई जा सकती है।
बालों और हेयर हेल्थ से जुड़ी जानकारी और असेसमेंट के लिए Traya जैसे हेयर-केयर प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं लेकिन किसी भी उपचार का चुनाव बालों की वास्तविक समस्या और उसके कारण के आधार पर किया जाना चाहिए।
कम उम्र में बाल सफेद होने के पीछे आनुवंशिक कारण सबसे बड़ी वजहों में से एक हो सकता है लेकिन पोषण की कमी, कुछ स्वास्थ्य स्थितियां, उम्र और अन्य जैविक प्रक्रियाओं की भूमिका भी हो सकती है।
हर सफेद बाल को किसी बीमारी का संकेत मानना जरूरी नहीं है। वहीं, बहुत कम उम्र में तेजी से बाल सफेद होने पर कारण को समझना उपयोगी हो सकता है। संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और जरूरत पड़ने पर मेडिकल जांच एक व्यावहारिक तरीका है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सफेद बालों को रोकने के लिए किसी एक तेल, सप्लीमेंट या घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय पहले यह समझा जाए कि उनके पीछे कौन-से कारक काम कर रहे हैं।