देहरादून: वर्ष 2008 बैच के आईएफएस रहे डॉ. साकेत बडोला ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने इंटरनेट मीडिया में वीआरएस लेने की जानकारी साझा की। इस्तीफा दिए जाने की कोई वजह उन्होंने नहीं बताई। जिसके बाद पूरे वन विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। साकेत बडोला कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर तैनात थे।
साकेत बडोला मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के रहने वाले साकेत वर्ष 2008 बैच के आईएफएस रहे हैं। वन विभाग में आने से पहले वह पशु चिकित्सक थे। तराई पश्चिमी वन प्रभाग में वह वर्ष 2009 में प्रशिक्षु डीएफओ भी रहे हैं। इसके बाद वह कार्बेट टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक के पद पर रहे। वे भारत में वन्य जीव तस्करी की रोकथाम के लिए बनी ट्रैफिकिंग सेल के मुखिया भी रहे।
राजाजी टाइगर रिजर्व में निदेशक का पद संभाला। राजाजी से तबादले के बाद जुलाई 2024 में वे कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर आए थे। पिछले वर्ष उनकी मुख्य वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन हुआ था। वन महकमे में निदेशक बडोला कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे हैं। साल 2037 में सेवानिवृत्त होने वाले बडोला ने करीब 11 साल पहले ही सेवा छोड़ने की घोषणा की है।
साकेत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि- महीनों के गंभीर विचार-विमर्श के बाद, मैंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से VRS लेने का फैसला किया है। उन्होंने लिखा कि उत्तराखंड के पौड़ी जिले में एक साधारण परिवार के व्यक्ति के लिए, प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवा में शामिल होना किसी सपने के सच होने जैसा था। उन्होंने लिखा कि अपने सेवाकाल के दौरान, मैंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। मुझे उम्मीद है कि मैं भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखूंगा और राष्ट्र निर्माण में हरसंभव योगदान दूंगा।
निदेशक बडोला ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। पिछले दो साल में वीआरएस मांगने वाले वह तीसरे आईएफएस अधिकारी हैं। इससे पहले वन विभाग के मुखिया रहे अधिकारी भी वीआरएस ले चुके हैं। लगातार अधिकारियों के वीआरएस मांगने से वन महकमे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।