मसूरी: देहरादून के पुरकुल से मसूरी तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के निर्माण की गति और निर्धारित समयसीमा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रवींद्र जुगरान ने दो दिनों तक परियोजना के 26 पिलरों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति पर चिंता जताते हुए कहा कि पांच से छह पिलरों की सुरक्षा की समीक्षा और जांच की जरूरत है। परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब इसकी समयसीमा मई 2027 कर दी गई है।
रवींद्र जुगरान ने परियोजना के विभिन्न पिलरों की स्थिति और निर्माण कार्य का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि अभी करीब चार पिलर खड़े नहीं हो सके हैं। उनके अनुसार, निर्माण कार्य की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।
निरीक्षण के दौरान पर्यावरण प्रेमी डॉ. दीपक जोशी और रवींद्र सिंह गुसाईं भी मौजूद रहे। जुगरान ने कहा कि निर्माण कार्य में तेजी लाने की जरूरत है। उन्होंने पिलरों की सुरक्षा को लेकर भी जांच कराने की आवश्यकता बताई।
पुरकुल-मसूरी रोपवे परियोजना की शुरुआती लागत करीब 285 करोड़ रुपये बताई गई थी, जो अब बढ़कर लगभग 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। निर्माण की लागत बढ़ने के साथ ही परियोजना को पूरा करने की समयसीमा में भी बदलाव हुआ है।
रवींद्र जुगरान ने निर्माण की धीमी गति पर चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए तय समय पर रोपवे का संचालन शुरू होना मुश्किल दिखाई देता है। हालांकि, लागत में बढ़ोतरी और निर्माण में देरी के कारणों को लेकर संबंधित कार्यदायी संस्था की आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पुरकुल से मसूरी के बीच प्रस्तावित रोपवे की लंबाई करीब साढ़े पांच किलोमीटर होगी। योजना के मुताबिक, इसमें लगभग 52 केबिन होंगे और यात्रियों को पुरकुल से मसूरी तक पहुंचने में करीब 35 मिनट लगेंगे।
परियोजना पूरी होने के बाद मसूरी जाने वाले पर्यटकों को सड़क मार्ग के अलावा परिवहन का एक वैकल्पिक साधन मिल सकेगा। पर्यटन सीजन के दौरान सड़क पर वाहनों का दबाव कम होने की भी उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक असर रोपवे का संचालन शुरू होने और यात्रियों की संख्या पर निर्भर करेगा।
परियोजना को शुरुआती कार्यक्रम के अनुसार सितंबर 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब निर्माण पूरा करने का लक्ष्य मई 2027 रखा गया है। रवींद्र जुगरान ने निर्माण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए नई समयसीमा पर भी सवाल उठाए और काम में तेजी लाने की जरूरत बताई।
रोपवे को मसूरी के पर्यटन विकास और यातायात का दबाव कम करने के संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में निर्माण में देरी से परियोजना की लागत और समयसीमा के साथ-साथ इस परिवहन सुविधा के लिए इंतजार भी बढ़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान पांच से छह पिलरों की सुरक्षा समीक्षा की जरूरत का मुद्दा भी उठाया गया। इन पिलरों की वास्तविक स्थिति तकनीकी जांच और संबंधित विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
परियोजना की गुणवत्ता, पिलरों की मजबूती, निर्माण की प्रगति और संशोधित समयसीमा को लेकर संबंधित विभाग या कार्यदायी संस्था का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।