मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में एक गरीब परिवार इन दिनों बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे ओंकार की पत्नी करीब दो वर्षों से पैरालिसिस के कारण बिस्तर पर हैं, वहीं अब ओंकार खुद गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में बुखार होने के बाद चिकित्सकीय जांच कराई गई, जिसमें उनके दिल में दो छेद होने की बात सामने आई। चिकित्सकों ने उन्हें जल्द उपचार कराने की सलाह दी है।
ओंकार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। परिवार की कमाई का एकमात्र सहारा उनका इकलौता बेटा है, जो मजदूरी कर माता-पिता का भरण-पोषण कर रहा है। रोजाना की मजदूरी से घर का खर्च चलाना ही मुश्किल है। ऐसे में ओंकार के इलाज का खर्च जुटाना परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।
ओंकार की पत्नी पिछले करीब दो वर्षों से पैरालिसिस के कारण बिस्तर पर हैं। वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं और लंबे समय से बीमारी से जूझ रही हैं। अब पति की बीमारी की जानकारी सामने आने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई है।
परिजनों के मुताबिक, पत्नी अपने पति के इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रही हैं। परिवार के पास उपचार कराने की इच्छा और हिम्मत तो है, लेकिन आर्थिक स्थिति इसकी इजाजत नहीं देती। समय पर इलाज नहीं मिल पाने को लेकर परिवार चिंतित है।
ओंकार के परिवार में कमाई का मुख्य सहारा उनका इकलौता बेटा है। वह मजदूरी करके अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने की कोशिश कर रहा है। उसकी रोजाना की कमाई से घर का खर्च और बीमार मां की जरूरतें पूरी करना ही मुश्किल है।
अब पिता के इलाज का खर्च भी सामने आने से परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है। निजी स्तर पर उपचार का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं है।
परिवार की परेशानी इस वजह से भी बढ़ गई है कि ओंकार का आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाया है। परिजनों का कहना है कि कई बार आवेदन करने के बावजूद आधार कार्ड नहीं बन सका।
आधार कार्ड नहीं होने के कारण उन्हें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवार की मांग है कि प्रशासन आधार कार्ड बनवाने में सहयोग करे, ताकि यदि ओंकार योजना के लिए पात्र हैं तो उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके और इलाज का रास्ता आसान हो।
ओंकार के पड़ोसी दिनेश ने बताया कि ओंकार बेहद गरीब हैं और इस समय परिवार काफी परेशानी में है। उनकी पत्नी पहले से बीमारी के कारण बिस्तर पर हैं और अब ओंकार खुद गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
दिनेश ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, सरकार और प्रशासन को इस परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए। समय पर सहायता मिलने से ओंकार का उपचार कराया जा सकता है और परिवार को इस मुश्किल परिस्थिति से उबरने में मदद मिल सकती है।
ओंकार का परिवार अब सरकार, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह निजी स्तर पर महंगा उपचार करा सके।
परिवार चाहता है कि ओंकार को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ जरूरत के मुताबिक आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाए। बिस्तर पर पड़ी पत्नी अपने पति के ठीक होने की उम्मीद लगाए हैं, जबकि इकलौता बेटा मजदूरी कर माता-पिता की जिम्मेदारी संभालने की कोशिश कर रहा है।
परिवार की अपील है कि समय रहते मदद का हाथ बढ़ाया जाए, ताकि ओंकार को आवश्यक उपचार मिल सके और परिवार इस मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकल सके।