देहरादून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ की यात्रा करने पर कुछ लोगों द्वारा उठाई गई आपत्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कट्टरपंथी लोगों को कड़ा जवाब दिया है।
हरीश रावत ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि, आज एक चिंताजनक मगर महत्वपूर्ण नहीं बयान समाचार पत्र में पढ़ने को मिला। सारा अली खान श्रद्धापूर्वक केदारनाथ पहुंचती हैं, पिछली बार भी पहुंचीं, इस बार भी पहुंचीं। वे नवाब पटौदी व शर्मिला टैगोर जी की पोती हैं और सैफ अली खान की बेटी हैं, उनकी आस्था है। लेकिन साथ-साथ अपने धर्म का भी पालन करती हैं, जो धर्म उनको पिता से मिला है। मगर कुछ कूपमंडूक लोग हैं, वो उनके वहां जाने को लेकर के फतवा जारी कर रहे हैं। भैया, ये कट्टरपंथ कहां ले करके जाएगा हमको, हमारे समाज को, हमारे देश को, इस पर विचार करना चाहिए। धर्मपरायण होना एक बात है और कट्टर होना एक बात है।
रावत ने लिखा है कि, आप मुलायम रह करके भी धर्मपरायण हो सकते हैं। अपने धर्म का पालन करिए, अपने धर्म के गुणों का प्रचार करिए। मगर कोई किसी देवता में आस्था रख रहा है, आप किसी को आस्था रखने से क्यों रोक रहे हैं? मैं जानता हूं इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती है। मगर आस्था और मूर्ति पूजा में अंतर है। कोई आस्था रख रहा है, किसी स्थल में जा रहा है और वहां से हो सकता है वो ध्यान लगाकर अल्लाह को भी याद कर रहे हों। क्योंकि दुनिया में सभी भूमि नारायण की है, सभी भूमि अल्लाह की है, सभी भूमि गॉड की है, भगवान की है।
पूर्व सीएम रावत ने कहा है कि, कट्टरपंथ से समाज और भारत यूं ही बड़े दुखी हैं। जब भी ऐसे समाचार मैं पढ़ता हूं, चाहे किसी पक्ष से हों, इधर-उधर, दोनों तरफ आजकल कमी नहीं है ऐसे पहलवानों की जो केवल अपनी को चर्चा में लाने के लिए समाज को दंश देने का काम करते हैं। ये दोनों तरफ हैं, ये हिंदुओं में भी हैं, ये मुसलमानों में भी हैं और मगर ये किसी के हितैषी नहीं हैं, न हिंदू के हितैषी हैं, न मुसलमान के हितैषी हैं। ये धर्म और अपने धर्म के भी हितैषी नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश के बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने सारी अली खान की केदारनाथ यात्रा को 'गुनाह' बताया है। उन्होंने कहा है कि, 'मुझे जानकारी मिली है, और कई युवा मुसलमानों ने भी मुझसे अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने और वहां प्रार्थना करने के बारे में पूछा है। क्या शरीयत के हिसाब से ऐसा करना जायज है, क्या शरीयत इसकी इजाजत देती है?'
उन्होंने कहा है कि, 'इस पर मैं इस्लामिक शरीयत का नजरिया और इस मामले में उसका क्या हुक्म है, यह स्पष्ट करना चाहता हूं। किसी भी मुसलमान के लिए, चाहे वह पुरुष हो या महिला, किसी दूसरे धर्म की आस्था में शामिल होना, प्रार्थना करना और धार्मिक अनुष्ठान करना शरीयत के अनुसार नाजायज माना जाता है। ऐसे कामों की इजाज़त नहीं है। इसलिए, अगर सारा अली खान ने अपनी मर्जी और इच्छा से ये काम किए हैं, यानी केदारनाथ मंदिर जाना, प्रार्थना करना और आशीर्वाद मांगना, तो उन्होंने एक गुनाह किया है, जो कि हराम है।'
सारा अली खान केदारनाथ की यात्रा पर पहली बार नहीं गई हैं, वे इससे पहले भी कई बार इस हिंदू तीर्थ स्थल पर पहुंची हैं। उनका फिल्म का कैरियर भी केदारनाथ से जुड़ा है। उनका पहली फिल्म ही 'केदारनाथ' थी। इस फिल्म की शूटिंग केदारनाथ में ही हुई थी। जब केदारनाथ फिल्म आई थी तब भी कुछ कट्टरपंथियों ने इसकी कहानी को लेकर आपत्ति जताई थी। यह विवाद कई दिन चला था।